भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की विजय शंखनाद रैली
स्थान: झांसी का जीआईसी ग्राउंड
तिथि: 25 अक्तूबर 2013
सर्वमान्य नेता बन कर उभरना चाहते हैं मोदी!
सब हेड: मुजफ्फरनगर दंगा के बहाने मुस्लिमों को साधने की कोशिश
- 84 के दिल्ली दंगे के लिए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया
कुमार
भवानंद
झांसी। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र
मोदी ने वीरांगना लक्ष्मीबाई की धरा पर जिस अंदाज में अल्पसंख्यकों की
दुखती रग पर हाथ रखा है, उससे उन्होंने यह साफ- साफ संकेत देने की कोशिश की
है कि वह देश की राजनीति में हर वर्ग का भरोसा जीतना चाहते हैं। इससे
पहले कानपुर रैली में उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे से खुद को दूर रखा,
वहीं झांसी में भी वह मंदिर
से तो दूर रहे ही, राहुल गांधी द्वारा मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर दिए बयान
के बहाने अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश की।
शुक्रवार को जीआईसी
ग्राउंड पर आयोजित रैली में जुटी भीड़ को उम्मीद थी कि मोदी सपा सरकार को
कठघरे में खड़ा करने के बहाने चौरासी कोसी परिक्रमा और मंदिर जैसे मसले पर
बोल सकते हैं। लेकिन, गुजरात के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय नेता के रूप में
खुद को स्थापित करने
में जुटे भाजपा नेता न केवल इससे दूर रहे, बल्कि मुजफ्फरनगर दंगे की चर्चा
कर खुद को अल्पसंख्यकों के हितैषी के रूप में प्रोजेक्ट किया। उन्होंने
जिस तल्ख अंदाज में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अल्पसंख्यकों से
माफी मांगने की नसीहत दी, वह गौर करने लायक था।
भाजपा नेता यहीं नहीं
थमे, 84 में दिल्ली में हुए दंगे की चर्चा कर सिखों की दुखती रग पर भी हाथ
रखा। बेशक, यहां भी
उन्होंने राहुल गांधी के बयान का ही सहारा लिया। लेकिन, अपने वाक चातुर्य
से उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि कांग्रेस के शासन में अल्पसंख्यक
कतई सुरक्षित नहीं हैं।
यूपी में मोदी की अब तक हुई दो रैलियों पर गौर
करें तो उन्होंने खुद को विकास पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिश
की है। इतना ही नहीं शोभन सरकार के खिलाफ की गई टिप्पणी के तुरंत बाद
उन्हें सम्माननीय बता
कर विवादित वक्तव्यों से दूरी बनाने में भी उन्होंने देरी नहीं की। हर
वर्ग को जोड़ने का उनका यह प्रयास बताता है कि वह राजनीति की बिसात पर सधे
अंदाज से गोटियां फिट कर रहे हैं। यानी, सर्वमान्य नेता बनने के लक्ष्य के
और करीब होते जा रहे हैं।
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