Tuesday, April 29, 2014

बस एक ही तमन्ना, झूठी उम्मीदों की सीढ़ियों पर न चढ़ाएं


झांसी- ललितपुर लोक सभा क्षेत्र (ग्राउंड जीरो)
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कुमार भवानंद
झांसी। 2009 में राष्ट्रीय मीडिया में घिसौली गांव अचानक सुर्खियों में छा गया था। दरअसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस गांव के दलितों के बीच पहुंच कर न केवल उन्हें विस्मित कर दिया था, बल्कि उनके घर के आंगन में रखी खाट पर बैठ कर उन्हीं लोगों के साथ भोजन भी किया था। गरीबी और भुखमरी के बीच जीने वाले इन लोगों के लिए तब यह नए सवेरे का संदेश था, लेकिन अब उनमें निराशा है। जिस जमुना के घर उन्होंने भोजन किया था, उसका कच्चा घर बारिश में गिर चुका है। पक्के मकान की उम्मीद बारिश में गिरे घर की तरह जमींदोज हो चुुकी है। रोजगार के अभाव में जमुना महुआ बीन कर इकट्ठा करता है, जबकि इस कड़क धूप में सुखाने का काम उसके वृद्ध पिता वृषभान करते हैं। राहुल के लिए खाना बनाने वाली जमुना की पड़ोसन साठ वर्षीया शांति इस बात से दुखी हैं कि उसका बेटा मूलचंद रोजगार के अभाव में खेतों पर काम करने को मजबूर है। वह कहतीं हैं उन जैसे गरीब लोगों को सपने ही क्यों दिखाए जाते हैं। बेहतर हो कि उन्हें ऐसी झूठी उम्मीदों की सीढ़ियों पर चढ़ाया ही न जाए। एक बार फिर उन्हें सब्जबाग दिखाने के लिए नेताओं की फौज उन तक पहुंचने लगी है। कोई उनके सपने को पूरा करने की बात कह रहा है तो कोई यह बताने की कोशिश कर रहा है कि इस बार उन्हें आजमा लो, वह उनके सपनों को पंख लगा देगा।
अपने जीवन के नब्बे वसंत देख चुके बबीना विधानसभा क्षेत्र में स्थित जौनपुर मजरा के वृद्ध जसरथ कहते हैं कि आजादी से पहले हम एक थे। उस समय के नेता हमें एक सूत्र में बांधते थे, लेकिन इस चुनाव में जीत के लिए हर दल के प्रत्याशी जात- पात का सहारा ले रहे हैं। हमारे गांव में मिश्रित आबादी है। हर जाति के नेता आते हैं और अपनी- अपनी जाति के लोगों को किसी खास प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालने को कहते हैं। क्या इसी तरह हम लोकतंत्र की मजबूती की बात करेंगे? लाठी के सहारे बुढ़ापा काट रहे जसरथ के मुताबिक इस बार बदलाव की बयार है। हालांकि, वह यह कहने से नहीं चूकते कि सांसद कोई बने, रुपये का दस पैसा ही गरीबों के दरवाजे तक पहुंचेगा। उनकी इस बात पर किसान नाथू राम भी सिर हिला कर सहमति जताते दिखे, वहीं पंडिताई कर जीवन यापन करने वाले महेश तिवारी भी सहमत थे।
बात चली चुनावी बयार की तो हर दल को वे अपने- अपने तर्क से जय- पराजय की कसौटी पर कसते नजर आए। हां, उन्होंने यह कहने में कोई हिचक नहीं दिखाई कि भाजपा प्रत्याशी उमा भारती के मैदान में उतरने से इस बार का चुनाव न तो कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप जैन आदित्य के लिए आसान रह गया है और न ही सपा प्रत्याशी चन्द्रपाल सिंह और बसपा प्रत्याशी अनुराधा शर्मा के लिए। वह कहते हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप जैन आदित्य ने बबीना क्षेत्र में नहरों का जाल बिछवाने की योजना की स्वीकृति दिला दी है। लेकिन, जब तक धरातल पर नहरें नहीं खुदेंगी, लोग कैसे विश्वास कर लेंगे। बघौरा गांव के प्रकाश आदिवासी कहते हैं कि केंद्र में कांग्रेस के अलावा भाजपा और तीसरे मोर्चा की सरकार भी बन चुकी है। कांग्रेस और अन्य सरकारों में क्या अंतर रहा? हम जैसे तब पिछड़े थे, वैसे ही अब हैं। हालांकि, ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित बिजरौठा गांव के युवाओं की टोली बेबाकी से कहती है कि केंद्र सरकार में बदलाव जरूरी है। मोनू चौबे कहते हैं कि महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी दूर करने के मामले में कांग्रेस ने निराश किया है। एक बार भाजपा को मौका दिया जाना चाहिए। वहीं, कुछ युवाओं का कहना था कि बसपा को अच्छी सीट आई तो केंद्र में किंग मेकर की भूमिका में पार्टी आ सकती है। ऐसे में यूपी में विकास के लिए पार्टी दबाव बना सकती है। बिजरौठा स्टैंड के पास मिले श्यामू कहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने इस बार प्रदेश में जिस तरह विकास परक योजनाओं का संचालन किया है, उससे केंद्र में यदि पार्टी के प्रत्याशी जीत कर जाएंगे तो विकास की गाड़ी और तेजी से दौड़ेगी। वहीं, पहली बार वोटर बने झांसी विधानसभा क्षेत्र के रवि कुमार हों या मऊरानीपुर क्षेत्र के अशोक, वह चाहते हैं कि चुनाव कोई जीते, इस क्षेत्र का विकास होना चाहिए।
बहरहाल, ऊंट किस करवट बैठेगा यह फैसला 30 अप्रैल को मतदाता करेंगे, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में जीत की राह किसी के लिए आसान नहीं होगी।
 
 
उमा ने चुनाव को लाया लाइमलाइट में
झांसी। अपनी बेबाक टिप्पणी के कारण सुर्खियों में रहने वाली भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने इस बार झांसी- ललितपुर संसदीय सीट को भी लाइमलाइट में ला दिया है। उनके मैदान में उतरने से भाजपा के लिए यह सीट कितनी महत्वपूर्ण हो गई है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष 25 अक्तूबर को विजय शंखनाद रैली करने वाले पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी चुनावी सभा के लिए एक बार फिर झांसी आ रहे हैं। इतना ही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह मऊरानीपुर क्षेत्र में चुनावी सभा कर चुके हैं।
स्थिति यह है कि लगभग हर प्रत्याशी और उनके समर्थक यह बताने में संकोच नहीं करते कि उनका मुकाबला भाजपा से है। अब तक बसपा जिस अलग बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे को अपना बता कर इस क्षेत्र के लोगों को रिझाने में जुटी थी, उसे भी भाजपा ने हाईजेक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह कहतीं हैं कि केंद्र में मोदी की सरकार बन गई तो तीन साल के भीतर वह अलग बुंदेलखंड का राज्य बनवा देंगी। हालांकि, पिछले दिनों बसपा प्रत्याशी अनुराधा शर्मा के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करने आईं बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनके इस दावे की यह कह कर हवा निकालने की कोशिश की कि इसके लिए उन्होंने अपने सरकार के कार्यकाल में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर लोकसभा को भेज दिया था। इस मुद्दे पर बसपा बेहद गंभीर है। केंद्र में पावर आफ बैलेंस की स्थिति में बसपा अपने इस मुद्दे पर आगे भी प्रयत्न करेगी। वहीं, प्रदीप जैन आदित्य लगातार दुहरा रहे हैं कि अलग बुंदेलखंड राज्य उनके एजेंडे में पहले से ही है। वहीं, सपा प्रत्याशी चंद्रपाल सिंह यादव पृथक राज्य की जगह विकास को तरजीह दे रहे हैं।
बोले प्रत्याशी
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भाजपा से है मुकाबला: प्रदीप
झांसी। कांग्रेस प्रत्याशी व केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य कहते हैं कि इस चुनाव में भाजपा से उनका सीधा मुकाबला है। अन्य दलों के प्रत्याशी तो दूर- दूर तक उनके करीब नहीं हैं। अपनी जीत के दावे में वह कहते हैं कि किसी भी जनप्रतिनिधि से लोग क्या उम्मीद रखते हैं - विकास और सुख- दुख में उसके साथ खड़ा रहने वाला हो। वह सदैव अपने क्षेत्र के विकास में जुटे रहे। मेडिकल कालेज का उन्नयन, कृषि विश्वविद्यालय, रेल कोच कारखाना जैसे बड़े- बड़े प्रोजेक्ट उन्होंने यहां लाये। बबीना क्षेत्र में नहर की योजना भी उनके ही प्रयास से धरातल पर उतरने वाली है।
मेरा किसी से मुकाबला नहीं: उमा
इस चुनाव में उनका किसी प्रत्याशी से कोई मुकाबला नहीं है। वह विचारों की लड़ाई लड़ रहीं हैं। प्रदेश में पूर्व में सत्ता में रही बसपा का भ्रष्टाचार, कांग्रेस और सपा का कुशासन ही उनकी जीत को सुनिश्चित कर रहा है। चुनाव जीतने के बाद झांसी क्षेत्र का सर्वांगीण विकास उनका एकमात्र उद्देश्य है। इस पर वह हर हाल में खरी उतरेंगी।
चंद्रपाल भी भाजपा को मानते मुख्य प्रतिद्वंद्वी
सपा प्रत्याशी डॉ चन्द्रपाल सिंह मानते हैं कि इस चुनाव में उमा भारती ही उन्हें टक्कर दे रहीं हैं। कांग्रेस को वह जीत से कोसों दूर बताते हैं, वहीं कहते हैं कि बसपा प्रत्याशी को कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है। प्रदेश की सपा सरकार के अच्छे कार्य उनकी जीत की राह को प्रशस्त करेंगे। उनका कहना है कि महानगर को बी टू का दर्जा, पैरा मेडिकल कालेज, सीपरी बाजार ओवरब्रिज, मेडिकल कालेज में पांच सौ बेड का नया अस्पताल उनके ही प्रयासों से संभव हो पाया है।
जनता उनके साथ, दूर- दूर तक कोई नहीं: अनुराधा
बसपा प्रत्याशी अनुराधा शर्मा कहती हैं कि इस चुनाव में उनके मुकाबले कोई प्रत्याशी नहीं है। वह जात-पात की राजनीति नहीं करतीं हैं। विकास उनका एकमात्र उद्देश्य है। उनके पति स्व. पं रमेश शर्मा ने अपने मंत्रित्व काल में इस क्षेत्र के लिए कई कार्य किए। वह भी इसे आगे बढ़ाएंगी। मायावती सरकार के सुशासन को लोग याद कर रहे हैं। बसपा की जोरदार जीत होगी।

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