सोशल इंजीनियरिंग फेल होने से हारीं अनुराधा
सब हेड: ललितपुर और महरौनी में नहीं मिले अपेक्षित वोट
- तीसरी स्थान पर बसपा प्रत्याशी को करना पड़ा संतोष
- न ब्राह्मण और न दलित का मिला अपेक्षित साथ
कुमार भवानंद
झांसी। झांसी- ललितपुर संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी अनुराधा शर्मा की हार का कारण पार्टी के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले का फेल होना माना जा रहा है। जिस तरह भाजपा और सपा की झोली में वोट गिरे, वह साफ बताता है कि बसपा को न तो ब्राह्मणों का अपेक्षित साथ मिला और न ही पार्टी का वोट बैंक माने जाने वाले दलित वोटर बूथों तक पहुंचे।
यूं तो चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी प्रत्याशी ने पूरी ताकत झोंकी थी। प्रत्याशी ने गांव- गांव, गली- गली छान मारी थी। आश्वासन भी लोगों से खूब मिले, लेकिन बारी जब वोट डालने की आई तो उन्हें निराश ही किया। दरअसल, बसपा 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले वोट से इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि लोकसभा चुनाव में यह वोट उन्हें मिल गए और सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला कामयाब रहा तो जीत सुनिश्चित है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने यहां आयोजित चुनावी सभा में मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में डालने के लिए भाजपा की जीत का खौफ भी दिखाया, लेकिन परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व के सभी आकलन गलत साबित हुए। ललितपुर और महरौनी में बसपा के विधायक होने के बावजूद पार्टी को इन दोनों ही स्थानों पर क्रमश: 42961 और 57767 वोट ही मिले। इन दोनों ही स्थानों पर पार्टी प्रत्याशी को झांसी, बबीना और मऊरानीपुर की तरह तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। सभी विधान सभा क्षेत्रों में मिले मत की गणना करें तो अनुराधा शर्मा को 2,13,792 मत से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा 2,05,042 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रही थी। तब पार्टी प्रत्याशी अनुराधा शर्मा के पति स्व. रमेश कुमार शर्मा चुनाव मैदान में थे।
सब हेड: ललितपुर और महरौनी में नहीं मिले अपेक्षित वोट
- तीसरी स्थान पर बसपा प्रत्याशी को करना पड़ा संतोष
- न ब्राह्मण और न दलित का मिला अपेक्षित साथ
कुमार भवानंद
झांसी। झांसी- ललितपुर संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी अनुराधा शर्मा की हार का कारण पार्टी के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले का फेल होना माना जा रहा है। जिस तरह भाजपा और सपा की झोली में वोट गिरे, वह साफ बताता है कि बसपा को न तो ब्राह्मणों का अपेक्षित साथ मिला और न ही पार्टी का वोट बैंक माने जाने वाले दलित वोटर बूथों तक पहुंचे।
यूं तो चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी प्रत्याशी ने पूरी ताकत झोंकी थी। प्रत्याशी ने गांव- गांव, गली- गली छान मारी थी। आश्वासन भी लोगों से खूब मिले, लेकिन बारी जब वोट डालने की आई तो उन्हें निराश ही किया। दरअसल, बसपा 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले वोट से इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि लोकसभा चुनाव में यह वोट उन्हें मिल गए और सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला कामयाब रहा तो जीत सुनिश्चित है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने यहां आयोजित चुनावी सभा में मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में डालने के लिए भाजपा की जीत का खौफ भी दिखाया, लेकिन परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व के सभी आकलन गलत साबित हुए। ललितपुर और महरौनी में बसपा के विधायक होने के बावजूद पार्टी को इन दोनों ही स्थानों पर क्रमश: 42961 और 57767 वोट ही मिले। इन दोनों ही स्थानों पर पार्टी प्रत्याशी को झांसी, बबीना और मऊरानीपुर की तरह तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। सभी विधान सभा क्षेत्रों में मिले मत की गणना करें तो अनुराधा शर्मा को 2,13,792 मत से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा 2,05,042 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रही थी। तब पार्टी प्रत्याशी अनुराधा शर्मा के पति स्व. रमेश कुमार शर्मा चुनाव मैदान में थे।