Tuesday, May 20, 2014

सोशल इंजीनियरिंग फेल होने से हारीं अनुराधा


सोशल इंजीनियरिंग फेल होने से हारीं अनुराधा
सब हेड: ललितपुर और महरौनी में नहीं मिले अपेक्षित वोट
- तीसरी स्थान पर बसपा प्रत्याशी को करना पड़ा संतोष
- न ब्राह्मण और न दलित का मिला अपेक्षित साथ
 
कुमार भवानंद

झांसी। झांसी- ललितपुर संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी अनुराधा शर्मा की हार का कारण पार्टी के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले का फेल होना माना जा रहा है। जिस तरह भाजपा और सपा की झोली में वोट गिरे, वह साफ बताता है कि बसपा को न तो ब्राह्मणों का अपेक्षित साथ मिला और न ही पार्टी का वोट बैंक माने जाने वाले दलित वोटर बूथों तक पहुंचे।
यूं तो चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी प्रत्याशी ने पूरी ताकत झोंकी थी। प्रत्याशी ने गांव- गांव, गली- गली छान मारी थी। आश्वासन भी लोगों से खूब मिले, लेकिन बारी जब वोट डालने की आई तो उन्हें निराश ही किया। दरअसल, बसपा 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले वोट से इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि लोकसभा चुनाव में यह वोट उन्हें मिल गए और सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला कामयाब रहा तो जीत सुनिश्चित है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने यहां आयोजित चुनावी सभा में मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में डालने के लिए भाजपा की जीत का खौफ भी दिखाया, लेकिन परिणाम की घोषणा के बाद पूर्व के सभी आकलन गलत साबित हुए। ललितपुर और महरौनी में बसपा के विधायक होने के बावजूद पार्टी को इन दोनों ही स्थानों पर क्रमश: 42961 और 57767 वोट ही मिले। इन दोनों ही स्थानों पर पार्टी प्रत्याशी को झांसी, बबीना और मऊरानीपुर की तरह तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। सभी विधान सभा क्षेत्रों में मिले मत की गणना करें तो अनुराधा शर्मा को 2,13,792 मत से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा 2,05,042 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रही थी। तब पार्टी प्रत्याशी अनुराधा शर्मा के पति स्व. रमेश कुमार शर्मा चुनाव मैदान में थे। 



तीन गुना बढ़ा समर्थन, फिर भी चंद्रपाल जीत से रहे दूर


तीन गुना बढ़ा समर्थन, फिर भी चंद्रपाल जीत से रहे दूर
सब हेड: 2009 के चुनाव में मिले थे 1,32,076 वोट, अबकी मिले 3,85,422
- महानगर को बी टू श्रेणी का दर्जा दिलाने में निभाई थी अहम भूमिका
- प्रदेश सरकार से मेडिकल कालेज के विस्तारीकरण के लिए दिलाया धन
- चिरलंबित सीपरी बाजार ओवर ब्रिज के निर्माण का रास्ता कराया साफ
कुमार भवानंद

झांसी। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पूर्व सांसद डॉ. चन्द्रपाल सिंह यादव ने वर्ष 2009 में हुए चुनाव के मुकाबले इस बार लगभग तीन गुना अधिक वोट हासिल किये, लेकिन इस बार भी जीत का वरण नहीं कर सके। दूसरे नंबर पर ही उन्हें संतोष करना पड़ा।
सपा के राष्ट्र्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. सिंह ने लोकसभा चुनाव को लेकर काफी पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके लिए वह लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। आमलोगों में पैठ बनाने को हरसंभव प्रयास भी किया, लेकिन मोदी लहर ने उनकी चुनावी नैया को मंझधार से बाहर नहीं निकले दिया। 2012 में प्रदेश में सपा सरकार के गठन के बाद से वह लगातार क्षेत्र के विकास के लिए प्रदेश सरकार से योजनाएं व बजट ला रहे थे। इस क्रम में झांसी नगर की सड़कों के चौड़ीकरण के अलावा उन्होंने महानगर को बी टू श्रेणी का दर्जा दिलाने की चिरलंबित मांग भी पूरी कराई। इतना ही नहीं सीपरी बाजार में ओवरब्रिज के निर्माण के लिए बजट भी स्वीकृत कराया। इसके अलावा शासन से बुंदेलखंड क्षेत्र के एक मात्र मेडिकल कालेज पर मरीजों के भारी बोझ को देखते हुए पांच सौ बेड के विस्तारीकरण की योजना की स्वीकृति भी दिलाई। झांसी और ललितपुर जिले में कई अन्य योजनाओं की स्वीकृति दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। संभवत: यह एक बड़ी वजह रही कि वर्ष 2009 के चुनाव में 1,32,076 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे सपा प्रत्याशी डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव इस बार लगभग तीन गुना 3,85,422 वोट हासिल करने में सफल रहे। लेकिन, नरेंद्र मोदी के नाम पर चली देश व्यापी आंधी ने उनके विजय रथ को बीच राह में ही रोक दिया।
 




उम्मीदों के बोझ तले दब गए प्रदीप जैन

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